Tuesday, February 15, 2011

बांग्लादेश की बढ़ती ताकत


बांग्लादेश के सैन्य आधुनिकीकरण पर महेंद वेद की टिप्पणी
बांग्लादेश अपनी नौसेना और वायुसेना शक्ति को बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2019 तक बांग्लादेश नौसेना के पास बेस सुविधाओं वाली अपनी पहली पनडुब्बी होगी। बांग्लादेश वायुसेना के लिए कोक्स बाजार में अड्डा बनाया जा रहा है, जिससे समुद्री सीमाओं तथा अन्य सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। बांग्लादेश अत्याधुनिक युद्धक विमान और मिसाइलें हासिल करने का भी प्रयास कर रहा है। शेख हसीना ने 1970 के दशक में अपने पिता और देश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान का एक बयान उद्धृत करते हुए कहा-बांग्लादेश किसी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन किसी ने बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश की तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश अपनी नौसेना को एक आधुनिक और सुसज्जित सेना के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रहा है, ताकि उसकी समुद्री सीमा में विदेशी जहाजों के अवैध प्रवेश और तस्करी को रोका जा सके। यह इसलिए और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि बांग्लादेश का विशाल समुद्री क्षेत्र उसके राष्ट्रीय अस्तित्व का एक महत्वपूर्ण अंग है। बांग्लादेश का करीब 90 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। शेख हसीना पड़ोसी देशों के साथ समुद्री सीमा विवाद को सुलझाने का प्रयास भी कर रही हैं। हालांकि बांग्लादेश, भारत तथा म्यांमार के बीच समुद्र में तनातनी हुई है, लेकिन हसीना सरकार विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने का प्रयास कर रही है। समुद्री सीमा पर विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब म्यांमार ने पिछले साल बंगाल की खाड़ी में गहरे समुद्र में खनिज संसाधनों की खोज शुरू की। भारत ने भी बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश द्वारा जताए गए दावों वाले संसाधनों पर अपना दावा जताया है, जिससे दोनों देशों के बीच विवाद खड़ा हो गया। अक्टूबर 2009 में बांग्लादेश ने म्यांमार और भारत के साथ अपने समुद्री सीमा विवादों पर संयुक्त राष्ट्र से मध्यस्थता करने को कहा। उसका कहना था कि पड़ोसियों से इस मुद्दे को जल्दी नहीं निपटाया जा सकता। तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून पंचाट के सामने अपना-अपना पक्ष रखा है। जब तक फैसला नहीं आता तब तक तीनों देशों ने बातचीत जारी रखने का फैसला किया है। विवाद के समाधान से तीनों देशों को बंगाल की खाड़ी में हाइड्रोकार्बन की खोज में मदद मिलेगी। समुद्री सीमा समझौते से भारत, बांग्लादेश और म्यांमार को संभावित भंडारों की खोज शुरू करने में आसानी होगी। भारत ने बंगाल की खाड़ी के निचले हिस्सों में कुछ प्रगति की है। समझौता हो जाने से बांग्लादेश का गैस संकट कम करने और म्यांमार के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में मदद मिल सकेगी। म्यांमार के नए सीमांकित समुद्री क्षेत्र में गैस मिलने से चीन और भारत के बीच उसी प्रकार की प्रतिस्पद्र्धा शुरू हो जाने की आशा है, जैसी कि श्वे में गैस मिलने से हुई थी। दोहरे दावे वाले इलाकों में गैस मिलने से म्यांमार को भारत के साथ मजबूत आर्थिक, सामरिक और राजनीतिक संबंध कायम करने का अवसर मिलेगा। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सहयोग के लिए क्षेत्रीय बहुराष्ट्रीय संगठनों, खास तौर से बीआईएमएसटीईसी में संभावनाएं मौजूद हैं। अगर संयुक्त राष्ट्र पंचाट का फैसला आ जाता है तो समुद्री सीमा विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी। तीनों देशों के लिए तो यह जीत की स्थिति होगी। शेख हसीना भारत, नेपाल और भूटान जैसे अन्य दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों की ओर सहयोग का हाथ बढ़ा रही हैं। हसीना ने कहा है कि उनकी सरकार ने आर्थिक, राजनीतिक और राजनयिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए चटगांव और मोंगला बंदरगाहों को पड़ोसी देशों के लिए खोलने का फैसला पहले ही कर लिया है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

No comments:

Post a Comment